23.7k Members 49.9k Posts

आवाज

आवाज
अनसुनी मेरे दिल की आवाज
पिजरबद्ध पखेरु,बिन परवाज
विलम जरा तुम देते जो ध्यान
खंडित न होता प्रिय मेरा मान
घुटकर जख्म और गहरा हुआ
व्यर्थ चीखना,बलम बहरा हुआ
बरसता मेघ मन में ठहरा हुआ
तिरष्कृत-ताप कबसे भरा हुआ
ढुल ढुल मोती रहे बिखर यहाँ
तुझको इसकी पर फिकर कहाँ?
काश इन मोतियों को तुम चुनते
नेह के धागों में पिरो रिश्ते गुनते
आओ,मिल सपने सतरंगी बुन ले
निर्मोही,दिल की आवाज सुन ले
-©नवल किशोर सिंह

Like 2 Comment 0
Views 3

You must be logged in to post comments.

LoginCreate Account

Loading comments
नवल किशोर सिंह
नवल किशोर सिंह
वर्तमान-तिरुचि,तमिलनाडु
162 Posts · 3.5k Views
पूर्व वायु सैनिक, शिक्षा-एम ए,एम बी ए, मूल निवासी-हाजीपुर(बिहार), सम्प्रति-सहायक अभियंता, भेल तिरुचि, तमिलनाडु, yenksingh@gmail.com...