कविता · Reading time: 1 minute

आवाज दिल की

सफलता यूँ ही नहीं मिलती
मेहनत भी करना पड़ता है
पाने की खातिर हक अपना
किश्मत से लड़ना पड़ता है
कहते थे मुझसे जो पहले
पढ़ लिख लो राज करोगे तुम
अब उनसे मैं कहना चाहूँ
बिन पद क्या काज करोगे तुम
सपने देखे थे जितनों ने
सबके सपने ही टूट गए
या तो रूठे अपने उसके
या रब ही उससे रूठ गए
पाने को निकला जो मुकाम
हाँसिल भी शायद कर लेता
जो जाति प्रमाणपत्र के संग
आरक्षण रूपी पत्र दे देता

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