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आल इज वैल

Laxminarayan Gupta

Laxminarayan Gupta

कविता

October 11, 2017

भले भले ही बुरी लगे
इतनी बात सही है
जो दुखी है या सुखी है
ढोता है कर्मों का शैल
नथिंग इज़ रॉन्ग, ऑल इज़ वैल।

पहले भी धरती हिलती थी
चक्रवात थे, घर उजड़े थे
नगर-ग्राम फिर पुनः बसे थे
नियत नटी की रुकी न गैल
नथिंग इज़ रॉन्ग, ऑल इज़ वैल।

ए.सी.कार घूमते डॉगी
पिछले जन्मों के हैं योगी
और तब की पतिघातका
इस जन्म में बने रखौल
नथिंग इज़ रॉन्ग, ऑल इज़ वैल।

नियति नियम को जाना किसने ?
जैसा जाना, वैसा माना
निष्कर्षों पर कोई न पहुँचा
जो कल सच था, आज है फैल
नथिंग इज़ रॉन्ग, ऑल इज़ वैल।

Author
Laxminarayan Gupta
मूलतः ग्वालियर का होने के कारण सम्पूर्ण शिक्षा वहीँ हुई| लेखापरीक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत होने के बाद साहित्य सृजन के क्षेत्र में सक्रिय हुआ|
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