.
Skip to content

** आरजू **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

शेर

April 21, 2017

आरजू दिल की है

तमन्ना शब-ए-रोज की है

ऐ जिंदगी तूं तो बस

कुछ एक रोज की है ।।

?मधुप बैरागी

सम्बन्ध बदलते हैं

बदलना चाहे या ना चाहे

मौत आती है

मरना चाहे या ना चाहे ।।

?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
Recommended Posts
*** मेरे पसंदीदा शेर ***
मैं मशगूल था अपने ही ख्यालों में कब मशहूर हो गया क्या पता ।। ?मधुप बैरागी जख़्म भरे जाते नहीं ज़ाम-ए-शराब से नासूर बन जाते... Read more
*** ईश्वर की धर्मशाला  ***
यह संसार ईश्वर की धर्मशाला है जब चाहे तब खाली करा सकता है हम इसे कब से अपना घर माने बैठे हैं किरायेदार भी कभी... Read more
*** उड़ान ***
उड़ान का क्या कहना पंछी कब अपनी हार मानता पंछी मुड़ - मुड़ कर कब देखता वो घोंसला अपना उड़ान का पंछी।। ?मधुप बैरागी हर्जाना... Read more
*** कुछ हसरतें ***
कुछ हसरतें कुछ ख्वाहिसें दिल में बाकि है पूरा करें तो कैसे ना शराब है ना साकी है ।। ?मधुप बैरागी हम रोज नयी कविता... Read more