Aug 11, 2016 · कविता

आरक्षण

आरक्षण का राज हो गया
गधे के सिर पर ताज
हो गया!
शेर चौकीदार हो गया,
हॉय! देश का बन्टाधार
हो गया…
डाक्टर बने आरक्षण से
अफसर बने आरक्षण से
नेता बने आरक्षण से
पर
दिमाग कहाँ से लाओगे?
सिक्का अपना कैसे
जमाओगे?
वाह भाई! वाह!
कमाल हो गया,
आरक्षण का राज हो गया…
आरक्षण देश का श्राप हो गया
स्वाहा ! आऱक्षण में हमको करके,
क्या बाग डोर देश की
तुम सम्भाल पाओगे!
अंधकारमय देश करके
खुद ओझल हो जाओगे,
आरक्षण का………..!!

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नाम - Shalini srivastava निवास स्थान- U. P
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