आयो आयो रे बसन्त

हाँ रे आयो आयो रे बसन्त
चाली बसन्ती बयार बसन्त आयो रे
धरती ताके है आकाश बसन्त आयो रे
ओढ़ी पीली-पीली चूनर-धानी बसन्त आयो रे
सरसों सरसे खेतन के माही मन हरसायो रे
भागण चाल्यो री बयार मन सरसायो रे
हाँ रे आयो आयो रे बसन्त
चाली बसन्ती बयार बसन्त आयो रे
कोई सरस्वती पूजारी कोई प्रेम पूजारी रे
रस बरसे मन माही तन सरसायो रे
आयो आयो रे बसन्त मन हरसायो रे
प्रेम-पगी हर-नार हर मन भायो रे
देखो भस्म-रमायी-तन तन कीनो छार
योगी-मन कैसे यो काम समायो रे
खेलत-खेलत है पार्वती संग रंग-रास
भोले शंकर भंग आज खायो रे
हाँ रे आयो आयो रे बसन्त
चली बसन्ती बयार बसन्त आयो रे
काम बिछायो ऐसो जाल भोले मन भरमायो रे
कीनो काम को छार पर मन पार नही पायो रे
मन मन में व्यापे काम पार्वती संग रास रचायो रे
कार्तिकेय भयो जन्म असुर नाश करायो रे
हाँ रे आयो आयो रे बसन्त
चाली बसन्ती बयार बसन्त आयो रे
तनमन पग्यो बासन्ती रंग बसन्त आयो रे
तन भीगे मन भीगे भीगे रसीली नर-नार
रंगीलो रंग ऐसो बसन्त लायो रे
हाँ रे आयो आयो रे बसन्त
चाली बसन्ती बयार बसन्त आयो रे
मधुप बैरागी

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