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सर्दी आयी

दीपों की गर्मी
से शुरू हुई
पिचकारी पर होगी अंत
आई सर्दी
आई सर्दी
मफलर स्वेटर
ले आयी सर्दी ।

ठंडी ठंडी
पवन चले
पर्वत के नीचे
बर्फ गिरे
ओस की बुँदे
पत्तों पर जम जाती
कोहरे में
अदरक बाली चाय
ले आयी सर्दी ।

कड़ कड़ कड़
दांत करें
झूले की तरह
बदन हिले
लकड़ी धुंडी इधर उधर से
और अलाब
ले आई सर्दी ।

निकले कंबल
निकली रजाई
खड़ी हो गयी
पेड़ के नीचे पड़ी
चारपाई
खिड़की दरबाजे
बन्द हो गए
सांसों में भाप
ले आई शर्दी ।

बुड्डो की बढ़ जाती
चिंता
दो महीने में
उड़ जाये ना हंसा
दांत नही चवाएं कैसे
गजक का भोग
लगाएं कैसे ।

चूल्हे की
बढ़ गयी है आफ़त
हांडी की
आ गयी है सामत
पेटों के खुल गए
है ताले
जीव ले रही चटकारे ।

चट चट मुंफली
चटक रही है
गाजर हलबे की
खुसबू बिखर रही है
करेला लौकी तोरई
सब फुर्र हो गए
आलू गाजर गोबी
ले आयी सर्दी ।

सूरज की अकड़
हो गयी ढ़ीली
बर्फ से मोहब्बत
हो गयी जहरीली
धुप हो गयी अपनी
छाया से हो गयी दुश्मनी
बन्द हो गए
ऐसी कूलर
गर्मी का हीटर
ले आयी शर्दी ।

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प्रशांत सोलंकी
प्रशांत सोलंकी
Delhi.
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@@ ### मुंडे मुंडे मितरभिन्ना ## @@
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