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आया सावन झूम के

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

September 12, 2017

फिर आयो जी मनभावन सावन
धरा ने ओढ़ी धानी चुनरिया।
गगन हुआ मनमगन
बरसाई कारी-कारी बदरिया।
पनघट पर छेड़े कान्हा जब
गगरी में जल ले चली गुजरिया
लाज न मुरलीधर तुझको
देख रही है सारी नगरिया।

–रंजना माथुर दिनांक 06/07/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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