आमों वाले दिन (107)

आये फिर से देखो भैया आमों वाले दिन
खट्टी खट्टी मीठी मीठी यादों वाले दिन

जेबों में भर भर कर कच्ची कैरी लाते थे
डांट बाद में कितनी फिर मम्मी से खाते थे
थे बचपन के प्यारे भारी बस्तों वाले दिन
खट्टी खट्टी मीठी मीठी यादों वाले दिन

लंगड़ा चौसा और दशहरी मन को भाते थे
साथ बैठकर भैया दीदी के सँग खाते थे
अच्छे थे छत पर सोने की रातों वाले दिन
खट्टी खट्टी मीठी मीठी यादों वाले दिन

कचरी पापड़ चिप्स सूखते रहते थे घर में
तो अचार भी खट्टे मीठे डलते थे घर में
थे वो दादी के हाथों के स्वादों वाले दिन
खट्टी खट्टी मीठी मीठी यादों वाले दिन

छोटी छोटी बातों पर हम कितना लड़ते थे
बात बात पर तंग बहुत मम्मी को करते थे
थे वो प्यारे मस्ती मौज बहारों वाले दिन
खट्टी खट्टी मीठी मीठी यादों वाले दिन

पेड़ आम का भी था इक नानी के आंगन में
चढ़ कर उस पर खेला करते थे हम बचपन में
लगते हैं अब तो वो जैसे ख्वाबों वाले दिन
खट्टी खट्टी मीठी मीठी यादों वाले दिन

25-08-2020
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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