"आबरू" हुई लाचार

बहुत हो रहा दुराचार, हैवानियत का हाहाकार ।
दुर्योधन दुशासन के हो अवतार,
रावण से भी बढकर यार।
कैसा जुल्म किया है, लज्जा हो गई तार-तार,
दरिंदगी की हद हो गई, गए लगा अंगार।
दुशासन का अंत देखा , उजड़ा रावण का संसार।
आज के दुशासनो को, दंड देने क्या लेना होगा फिर अवतार।
गोविंद आएंगे ना अब राम आएंगे,
ना आबरू बचाएंगे, ना जान बचाएंगे।।
अबला तुम अब सबला हो जाओ, दुर्गा काली का रूप धरो,
इन कलयुगी दुशासनो का तुम स्वयं संहार करो।।

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