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मेरी गुड़िया

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

कविता

August 24, 2017

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आफत की पुड़िया, है मेरी गुड़िया,
हरदम करती है शैतानी।
बात किसी की कभी न सुनती,
करती वही जो मन में ठानी।
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भोली-भाली नादां है ये
दुनिया से बिल्कुल अनजानी।
ना कुछ सोचे, ना कुछ समझे,
यह करती रहती है मनमानी।
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खिल-खिल कर हँसती रहती है,
कभी भर लाये आँखों में पानी।
मीठी-मीठी मिश्री- सी है बोली,
बातों में तो है सबकी ये नानी।
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नटखट, चुलबुल प्यारी-प्यारी,
परियों जैसी है मेरी रानी।
मन हर्षाती मुझे लुभाती,
चाँद सी सुन्दर मेरी भवानी।
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तन कोमल तितली सी,
मन निश्छल पावन रूहानी।
हर पल नई शरारत उसकी,
लगती है मनभावन सुहानी।
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—लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली

Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
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