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आप अपनी दवा भी रखते हैं

आप अपनी दवा भी रखते हैं
हम दीये हैं हवा भी रखते हैं.!!

मुख्तसर लोग हैं जो आँखो में
शर्म ‘ ग़ैरत ‘ हया भी रखते हैं..!!

मौत की तलख़ियों से वाकिफ हैं
जिन्दगी का मज़ा भी रखते हैं..!!

जिस जगह हम हयात रखते हैं
उसके नीचे कज़ा भी रखते हैं..!!

जलवा ऐ जुम्बिश ऐ जानां मेरी
हम ग़ज़ल की अदा भी रखते हैं..!!

– राव नासिर

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Nasir Rao
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