गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

आपने आपसे टूटता रह गया

ग़ज़ल *आपने आपसे टूटता रह गया ।*

आपने आप से टूटता रह गया ।।
उम्रभर जिंदगी ढूढ़ता रह गया ।।

आदमी जो मिला दोस्ती मे मुझे ।
दर्द देकर मुझे लूटता रह गया ।।

बेवफ़ाई से बोझिल कटे रास्ते ।
मै रुका तो रुका रास्ता रह गया ।।

जीत मुझको मिली न रहे फांसले ।
जीतता जीतता हारता रह गया ।।

ज़िन्दगी मे सुनामी को मद्देनजर ।
देखकर मौत से वास्ता रह गया ।।

बढ़ गया दोस्तों का हर कारवाँ ।
मै वफ़ा बेवफ़ा देखता रह गया ।।

आज हरसूं नज़र आ रही बेबसी ।
वक़्त गुजरा मुझे रोकता रह गया ।।

@ राम केश मिश्र

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रकमिश सुल्तानपुरी मैं भदैयां ,सुल्तानपुर ,उत्तर प्रदेश से हूँ । मैं ग़ज़ल लेखन के साथ साथ कविता , गीत ,नवगीत देशभक्ति गीत, फिल्मी गीत ,भोजपुरी गीत , दोहे, हाइकू, पिरामिड…
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