.
Skip to content

आपकी बेवफाई

Bikash Baruah

Bikash Baruah

शेर

September 11, 2017

जरा सी बात पर आपको
क्यों इतना गुस्सा आया,
यकीन था हमें आपकी वफा पे
फिर क्यों हमें रुला दिया ।
आपको गर हमसे कोई शिकवा था
आप हमें हाल-ए-दिल बता देते,
मगर यों रुठ कर हमसे दूर जाकर
हमें छोड़ जाने की सजा तो न देते ।
अरमान थे हमारे दिल में
आपको अपना हमसफर बनायेंगे,
लेकिन पता न था अरमानों को आप
इस कदर कुचल कर चले जायेंगे ।
न जाने अब कैसे जी पायेंगे
बगैर आपके इस जहाँ में,
जो नफ्स लेते थे आपके लिए
उस नफ्स को छीन लिया आपने ।
जी भर चुका है मेरा
अब तो मौत ही है एक सहारा,
इतनी मेहरबानी कीजिए हम पर
कि निकले अब हमारा जनाजा।

Author
Bikash Baruah
मैं एक अहिंदी भाषी हिंदी नवलेखक के रूप मे साहित्य साधना की कोशिश कर रहा हू और मेरी दो किताबें "प्रतिक्षा" और "किसके लिए यह कविता" प्रकाशित हो चुकी है ।
Recommended Posts
ख़िज़ां के रखवाले बाग में बहार आने नहीं देते
ख़िज़ां के रखवाले बाग में बहार आने नहीं देते, मेरे गुलशन के ख़ार ताजी हवा लाने नहीं देते। वो एक नज़र देख लेते मेरे बिगड़े... Read more
मुक्तक
भूल जाओगी जब हमें हमसे दूर जाने के बाद,, याद आएँगे हम तुम्हारा साथ छूट जाने के बाद,, बड़ा नाजुक है ये दिल, पत्थरों से... Read more
आपकी मुस्कान से हमें प्रेरणा मिली है
शुक्रिया, कि आपकी मुस्कान से हमें प्रेरणा मिली है, पर आपके इस तरह मुँह फेर लेने से भारी वेदना मिली है। अब तो हमारी व्यर्थ... Read more
गर आपने हमसे दो पल बात कर ली होती
आपकी हमसे सब शिकायतें मिट गयीं होतीं, गर आपने हमसे दो पल बात कर ली होती। हज़ारों रिश्ते टूट जाते हैं सिर्फ इतनी बात पर... Read more