आपकी गली से

आपकी गली से गुजरता हूँ आपका दीदार करने के लिए।
देख कर आपको अंदर ही अंदर ठंडी आहें भरने के लिए।

और कुछ नहीं मांगता मैं उस खुदा से अपनी दुआओं में,
आपके दिल में जगह मिल जाये ताउम्र बसने के लिए।

आपकी जुल्फों की छाँव में सुकून से बीते जिंदगी मेरी,
आपकी गोद मिल जाए मुझे अपना सिर रखने के लिए।

आपके हाथों में सजे मेहँदी मेरे नाम की ये दुआ करता हूँ,
प्यार से हमें फुर्सत ना मिले, वक़्त ही ना हो लड़ने के लिए।

आप जगाओ मुझे प्यार से मेरे बालों में हाथ फिराते हुए,
और कहो चाय इंतजार कर रही है होंठों से लगने के लिए।

यूँ ही हंसते मुस्कुराते कट जाये जिंदगी एक दूजे के सहारे,
और दुआ करें हम अगले जन्म में फिर से मिलने के लिए।

बस आप भी मुझे चाहते हो इतना कह दो एक बार,
दिल मेरा धड़क रहा है आपके कदमों में बिछने के लिए।

सुलक्षणा मत सोचो इतना अब तो हां कर दो खुदा के लिए,
विकास तो कब से तैयार बैठा है दूल्हे की ज्यूँ सजने के लिए।

©® डॉ सुलक्षणा अहलावत

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लिख सकूँ कुछ ऐसा जो दिल को छू जाये, मेरे हर शब्द से मोहब्बत की... View full profile
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