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आधुनिक नेता

डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

कविता

February 5, 2017

तीन यांत्रिक,
एक अनपढ़
दोस्त बन गए एकाएक
चारों मिल
देशाटन को
निकल पडे एकाएक
यांत्रिकों ने सोचा-
क्यों न बनाएं एक नेता
यांत्रिक त्रय के शोध ने
फिर गढ़ डाला एक नेता ।
नेता अस्तित्व में आया
उसको मौसम भाया
उसने मांगी एक बंदूक
यांत्रिक हुए प्रसन्न
अविष्कार से अभिभूत
बना डाली बन्दूक
फिर-
कालचक्र ने ली करवट
नेता ने उठाई बन्दूक
तीनों यांत्रिक मारे गए एकाएक
यह देख
अनपढ़ घबड़ाया
घबड़ाकर चिल्लाया-
अपने सृष्टिकर्ता को ही,
क्यों मार दिए नेताजी एकाएक
नेता अनपढ़ के भोलेपन पर मुस्काया
और रहस्य बताया
इतना भी नहीं समझे/जिससे ये-
फिर न बना सकें
मेरे जैसा कोई और नेता एकाएक।

Author
डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 1000 से अधिक लेख, कहानियां, व्यंग्य, कविताएं आदि प्रकाशित। 'कर्फ्यू में शहर' काव्य संग्रह मित्र प्रकाशन, कोलकाता के सहयोग से प्रकाशित। सामान्य ज्ञान दिग्दर्शन, दिल्ली : सम्पूर्ण अध्ययन, वेस्ट बंगाल : एट ए ग्लांस जैसी... Read more
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