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आधार छंद–मुक्तामणि (दोहा मुक्तक)

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

मुक्तक

March 1, 2017

1
हँसते रोते ज़िन्दगी, अपना समय बिताती
मुश्किल राहों से हमें , मंज़िल तक पहुँचाती
खत्म न होती है कभी , इसकी सुनो पढ़ाई
पाठ नया हर रोज ही , पढ़ा हमें ये जाती

2
खुश रहना ही शत्रु का , लगती एक सजा है
सुख हरने में ही जिसे , आता बहुत मज़ा है
देख दूसरों को कभी, खुद को दुखी न करना
काम करो जिसमे सदा, दिल की रही रज़ा है

3
यादों के हम गॉव में , बस घूमा करते हैं
बीते पल में पाँव ये , खुद ही चल पड़ते हैं
बिछड़ गए हैं लोग जो , याद उन्हें कर करके
नैनों की हम नाँव में , आँसूं ही भरते हैं

4
पाकर तुमसा मीत हम ,फूले न समाते हैं
लिख लिख कर हम प्रीत के, गीत गुनगुनाते हैं
जो हमें रुलाते रहे , अकेला ही समझकर
वो मौसम भी अब हमें, देख मुस्कुराते हैं

डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद(उ प्र)

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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