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आदमी

Lakshya thakur

Lakshya thakur

मुक्तक

April 28, 2017

कभी टूटे खिलोने के लिए रोये
कभी टूटे दिल से भी मुस्कराये
जाने कौन सी मिट्टी से बना है आदमी
सूखकर, टूटकर , बिखरकर
फिर से खिल जाये
,,,,लक्ष्य@myprerna

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Author
Lakshya thakur
मेरी रचनाएँ दिल से निकलती हैं जिनमें काव्यशिल्प से ज्यादा भावों का जोर होता है।यहाँ भाव और संवेदनाओं से ही काव्य के माधुर्य का उद्भव हुआ है।