गीत · Reading time: 1 minute

आदमी

है हाड़, मॉस, लहू से तैयार आदमी.
पानी का बुलबुला भी औ बयार आदमी.
अपने पे मगर आ गया,जो मोदी की तरह,
तो देश में बनता है वो सरकार आदमी.

ममता,दया,धरम-करम का सार आदमी,
होता पतित चरित्र से लाचार आदमी,
आत्मबल बढ़ाया जिसने, मोदी की तरह,
इतिहास में वो बन गया विचार आदमी.

कर्मों से बनता शेर और सियार आदमी,
जीवों में सबसे धीर होशियार आदमी,
गरीब तपके बनता है जब मोदी की तरह,
तो पीढ़ियों का होता है उद्धार आदमी.

प्रदीप तिवारी ‘धवल’

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मैं, प्रदीप तिवारी, कविता, ग़ज़ल, कहानी, गीत लिखता हूँ. मेरी तीन पुस्तकें "चल हंसा वाही देस " अनामिका प्रकाशन, इलाहाबाद और "अगनित मोती" शिवांक प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली तथा अभी…
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