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आदमी (3)

राशन ख़रीदने
किसी कठारख़ाने
की दूकान पर,
जो लगी हो
लम्बी-सी कतार ।
किस चीज की है
वह कतार , यह
कुछ-कुछ समझ में
आने बाली बात है ।
प्रमाणपत्र हाथ में लिए
किसी सरकारी या
ग़ैर-सरकारी दफ्त़र
के सामनें ,जो लगी हो
उदासीन-सी कतार ।
वह कतार क्या है ?
यह भी तुम्हारी या
हमारी समझ में
आने बाली बात है ।
लेकिन-यहाँ-वहाँ,
और जहाँ – तहाँ
कचरा बटोरने के लिए
जो लगीं हों
लम्बी-सी कतारें
समझ लो वे कतारें हैं
आज के आदमी कीं ।

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ईश्वर दयाल गोस्वामी
ईश्वर दयाल गोस्वामी
सागर , मध्यप्रदेश
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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02...