आदमी (2)

भूगोल पर
धुआँ फूँकता
ले जाना चाहता है
विज्ञान को ,
एक सख्स़़ आकाश तक।
जिसे हम
आदमी के नाम
से जानते हैं ।
और वह आदमी
बेख़बर है पूरी तरह
इस बात से कि-
भूगोल की शरण ही
प्रादुर्भाव है
विज्ञान का ।

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