आदमी (1)

श्याम-पट पर
अक्षरों की तरह
चमकदार नहीं है
आदमी ।
आदमी अब
अक्षरों पर
श्याम-पट की
तरह काला और
उपयोग के बाद
दीवाल पर
किसी कील के
सहारे टाँगे गए
वस्त्र की तरह
मैला है ।
वैसे आदमी
बहुत कुछ है,
किन्तु-आदमी आज
यदि कुछ नहीं है
तो वह आदमी
नहीं है।क्योंकि-
उसने किया है,
अपना पूरा
वैज्ञानिक-विकास
और वह विकास भी
इस तरह है कि-
उसे अपने आदमी
न होने का
ज़रा भी अफ़सोस
नहीं है ।

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