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आदमी तो आदमी है सिर्फ आदमी

sunil soni

sunil soni

गज़ल/गीतिका

February 24, 2017

हर वक्त हर रोज परेशां है आदमी
कहीँ उनसे कही खुद से परेशां है आदमी।।

नियति का सर्वश्रेष्ट है उपहार आदमी
पर औरो से कही ज्यादा परेशां है आदमी ।।

किसने किया गुनाह सजा किसको है मिली
खुद अपने गुनाह से है गुनहगार आदमी ।।

आए थे सज सवंर के लिए हसरतों का संग
एक रोटी की चाह ने ही तो मारा है आदमी ।।

क्यों सच से दूर ख्वाब सजाता है आदमी
पर मरने के बाद भी तो भटकता है आदमी।।

गर मान लेता जान लेता सच को आदमी
कि आदमी तो आदमी है सिर्फ आदमी।।

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Author
sunil soni
जिला नरसिहपुर मध्यप्रदेश के चीचली कस्बे के निवासी नजदीकी ग्राम chhenaakachhaar में शासकीय स्कूल में aadyapak के पद पर कार्यरत । मोबाइल ~9981272637