Mar 1, 2017 · कविता
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आदमी का मन

आदमी का …मन
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दिल बेचारा किस किस की सुने?
कभी इधर दौड़ लगाए
कभी उधर
कभी आपके पास
कभी उसके पास
कभी खुद के पास
कभी अपने जन्मदाता के साथ रहता
कभी दुनिया की सैर कर आए।
गौहाटी का न्यूमार्केट
जल कल खाक हूआ
बिना आकार वाले
की करामात तो देखो
मेरे दिल आकार वाला
आज तामिलनाडू पहूचाॅ
पानी ने हाहाकार मचाया
एक सौ पाॅच आदमी मर गये
दिल कराह उठा।
क्या हुआ होगा उन सब के साथ
मेरा दिल मुझ से कहता
थोड़ी सी सर्दी से परैशान हो ?
वो तो बेचारे जान से ही चलै गये
ममता शांत रहा कर ।।
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