गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

आदमीयत न तुम जुदा रखना दिल में थोड़ी सी तो वफा रखना ? लाख कर ले सितम ज़माना ये तुम न दिल में कभी जफ़ा रखना ? दाग़ किरदार पे न लग जाए स्याह दिल से तू फासला रखना ? खो गई हैं जो आरजूएं तो फिर भी जीने का हौसला रखना ? मिले तुमको दुआओं की दौलत पास मां – बाप को सदा रखना ? जान लेना गुनाह पहले तुम जब किसी से कोई गिला रखना ? दफ़्न हो जाऊं जब लहद में मैं दीप तुरबत पे तुम जला रखना ? खत्म “प्रीतम” न हो महक दिल से गुल मुहब्बत का तुम खिला रखना

आदमीयत न तुम जुदा रखना
दिल में थोड़ी सी तो वफा रखना
?
लाख कर ले सितम ज़माना ये
तुम न दिल में कभी जफ़ा रखना
?
दाग़ किरदार पे न लग जाए
स्याह दिल से तू फासला रखना
?
खो गई हैं जो आरजूएं तो
फिर भी जीने का हौसला रखना
?
मिले तुमको दुआओं की दौलत
पास मां – बाप को सदा रखना
?
जान लेना गुनाह पहले तुम
जब किसी से कोई गिला रखना
?
दफ़्न हो जाऊं जब लहद में मैं
दीप तुरबत पे तुम जला रखना
?
खत्म “प्रीतम” न हो महक दिल से
गुल मुहब्बत का तुम खिला रखना

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