आदत की कोई दवाई नहीं है ।

जैसा हूँ वैसा समझते रहे तो,
इसमें तो कोई बुराई नहीं है ।
दिल से मिलो अपने को सदा तुम,
ऐसे कि मानो कोई खांई नही है ।
दूरी सदा ही नुकसान करती
इसमें किसी की भलाई नही है ।
सही को बुरा कहने वाले कहेंगे ।
आदत की कोई दवाई नही है।
विन्ध्य प्रकाश मिश्र विप्र

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