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आत्म आलोचना

इंदिरा गुप्ता

इंदिरा गुप्ता

कविता

November 15, 2017

अपनी कमी देखना
आसान नहीं है
व्यवहार में इसका
प्रचार नहीं है।
पूर्वाग्रह नहीं हो
हो दृष्टि ईमानदार
हर रात समीक्षा करो
करो कमी की स्वीकार ।
दूसरा अपने को जान
निष्पक्ष मन को करें
दृष्टि को स्वछ बना
अपना समालोचन करें।
तभी अपनी कमियों को
हम पकड़ पाएंगे
तथा कोई सुधार
अपने मे कर पाएंगे।।

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