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आतमा की सबल लौ दिल में जगा लो/तभी तो सद्ज्ञान का सम्मान होगा

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

मुक्तक

February 22, 2017

सहजता के आवरण को अब सँभालो|
अहंकारी मैल को धोकर निकालो |
दिव्यता की कसौटी पर कसो निज को |
आतमा की सबल लौ दिल में जगा लो|

तभी तो सद्ज्ञान का सम्मान होगा|
स्वयं द्वारा ही स्वयं का मान होगा|
लिखेगा इतिहास तेरा, समय खुद ही |
दिल को भी ऊंचाइयों का भान होगा|

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

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Author
बृजेश कुमार नायक
कोंच,जिला-जालौन (उ प्र) के बृजेश कुमार नायक साहित्य की लगभग सभी विधाओं के रचनाकार हैं |08मई 1961को ग्राम-कैथेरी(जालौन,उ प्र)में जन्में रचनाकार बृजेश कुमार नायक की दो कृतियाँ "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" प्रकाशित हो चुकी है |पूर्व राज्य... Read more
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