May 12, 2021 · कविता
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आत्मविश्वास

नियती का निर्मम चक्र चला हुआ है ,
सर्वत्र दिशाओं में भय व्याप्त हुआ है ,
त्रासदी का दावानल फिर उग्र हुआ है ,
मृत्यु के अनल पाश से जीवन ग्रस्त हुआ है ,
धैर्य का बांध टूटता सा लगता है ,
अपने आप से मानव हारा सा लगता है ,
सांत्वना के स्वर निरर्थक फीके लगते हैं ,
अपने ही स्वार्थ में डूबे लोग झूठे लगते हैं ,
फिर भी ,
हृदय में आशा की एक किरण जागृत रहती है ,
जो सतत् संघर्षरत् रह जीने की प्रेरणा देती रहती है ,
रह -रह कर आत्मविश्वास का संचार करती रहती है ,
इस भावना से ,
कि जब ठान ली जाए , तो विजय
सुनिश्चित है ,
भय आक्रांत हो धैर्य टूट जाए , तो पराजय
निश्चित है ।

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Shyam Sundar Subramanian
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An ex banker and financial consultant.Presently engaged as Director in Vanguard Business School at Bangalore.... View full profile
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