आत्मबल

जहाँ अनुशासनों से युक्त, व्यक्तित्व होता है
वहां ही कर्म पूजा में निहित, नेतृत्व होता है
असंभव लक्ष्य भी संभव बने, हर कार्य पूरित हो
प्रेम -सद्भाव हो तो ह्रदय पर स्वामित्व होता है
प्रशंशक बन के माथा टेकते हैं धुर विरोधी भी
मनोबल पर टिका सारा जहाँ अस्तित्व होता है
पथिक तुम अनवरत सन्मार्ग पे ही अग्रसर होना
यहाँ तो जानकी का भी शक में, सतीत्व होता है
क्षमा सेवा दया करुना धरम और प्रेम का तरुवर
पनपता है उसी वसुधा, जहाँ नारीत्व होता है ..

प्रदीप तिवारी ‘धवल’
9415381880

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मैं, प्रदीप तिवारी, कविता, ग़ज़ल, कहानी, गीत लिखता हूँ. मेरी तीन पुस्तकें "चल हंसा वाही...
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