आतंकवाद पर दोहे

आतंकी को मारकर, देना उन्हें जलाय।
तब ही मरने से डरे, सबसे सही उपाय।1।

सत्य सत्य पहचानना, आतंकी की जात।
कोई इनकी जात नहि, नहि कोई औकात।2।

दानवता मानव कहे, उनको दानव जान।
मानवता आतंक को, लेते जो है मान।3।

जहर लिये मन में फिरे, पाने को सौगात।
दुनिया सारी जानती, क्या तेरी औकात?4?

मौत वरण कर सुखद  ही, मरो नहीं बेमौत।
जीवन जो अनमोल है, काहे नाहक खोत।5।

माना इस संसार में, भांति भांति के भेद।
मानवता की थाल में, जो करते हैं छेद।6।

फिर भी अपनी बात को, करो पटल पर पुष्ट।
बिना पटल पर पुष्ट के, हो मत जाना तुष्ट।7।

पढ़ो लिखो भाई मेरे, तब जानो अधिकार।
कोई बहका नहि सके, तब जीतो संसार।8।

परदे के पीछे छिपा, शातिर बैठा एक।
उसकी मन्सा जान लो, तब बन पाओ नेक।9।

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