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*आतंकवादी* दोहे

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

दोहे

July 12, 2017

“आतंकवादी” दोहे
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(१) आतंकी सैलाब में,दैत्य चलाते नाव।
बंदूकी गोली लिए,देते तन मन घाव।।

(२)आतंकी मजहब नहीं,शतरंजी ये चाल।
नफ़रती तेज़ाब भर,उगल रहा विषकाल।।

(३)मानवता अब रो रही,दहल गया संसार।
कहर ज़ुल्म का झेलता, मनुज करे चीत्कार।।

(४)निंदा करने से नहीं, रुकता अत्याचार।
गोली सीने पर चला,करो वार पर वार।।

(५)पूत लिए निज अंक में,सिसक धरा बतलाय।
दानवता को रौंध कर,अब दो इन्हें जलाय।।

डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”
संपादिक-साहित्य धरोहर
महमूरगंज, वाराणसी(मो.-9839664017)

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Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more
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