आज फ़िर तेरी याद ने

आज फ़िर तेरी याद ने
वो खोया हुआ पल लौटा दिया
आज फ़िर तेरी याद ने
वो उलझा हुआ कल सुलझा दिया

याद है वो लम्हा मुझे
जब तुझसे पहली बार मिला
लफ्ज़ कहीं पर घूम से थे
पर चल पड़ा था बातों का सिलसिला
उन बातों ने आज फिर दिल बहला दिया
आज फ़िर तेरी याद ने
वो खोया हुआ पल लौटा दिया

बारिशों में चाय की चुस्कियां
सर्दी के कोहरे में घुली मस्तियाँ
हर मौसम को और खुशनुमा बनाती
तेरे गुलाबी गालों की सुर्खियां
तेरी आँखों की गहराई में फिर डूबा दिया
आज फिर तेरी याद ने
वो खोया हुआ पल लौटा दिया

आज तू साथ नहीं, मैं भी ग़मज़दा नहीं
किस्मत में ना लिखा था साथ हमारा
इस बात से भी मैं ख़फ़ा नहीं
तेरी कमी ने फिर भी
मेरी आँखों को फ़िर भीगा दिया
आज फ़िर तेरी याद ने
वो खोया हुआ पल लौटा दिया
आज फ़िर तेरी याद ने
वो उलझा हुआ कल सुलझा दिया

–प्रतीक

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