Jul 25, 2017 · कविता
Reading time: 1 minute

आज है हरियाली अमावस्या

आज है हरियाली अमावस्या,
देखाे धरती की बदली है काया,
प्रकृति ने ओढी हरि चुनरिया,
नजाराे ने आंखाे काे लुभाया ,

चहक उठे पंछी,
झूम उठे पंथी,
महक उठे फूल,
साफ हुई धूल,

नभ पर छाये काले काले मेघ,
गगन पर चमके बिजली तेज,
मन में उठी नई नई तरंग,
चाैकड़ी भरने लगा सारंग,
।।जेपीएल।।।

2 Likes · 2 Comments · 325 Views
जगदीश लववंशी
जगदीश लववंशी
394 Posts · 15.2k Views
Follow 6 Followers
J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) ,MA (HINDI) & MSC (MATHS) , MA (POLITICAL SCIENCE) "कविता लिखना... View full profile
You may also like: