Jan 6, 2020 · कविता
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आज नहीं यदि लिख सकते तुम, कलम उठाओ कल लिख डालो,,

आज नहीं यदि लिख सकते तुम,
कलम उठाओ कल लिख डालो,,
बिखरे हैं जो शब्द पिरो कर,
सुंदर एक गजल लिख डालो,,

लिखने वालों ने खूब लिखा, पर,
सत्य नहीं सब गप्प लिखा है,,
हत्याओं को हत्यारा लिख
हत्यारों को ईश लिखा है,,
हत्यारों को हत्यारा लिख,
जो भी सच है सब लिख डालो,

बिखरें हैं जो शब्द पिरोकर…

महिमामंडन कर षडयंत्रो का,
कथा, काव्य और गीत लिखा है,,
सहचर को बैरी, याचक दाता,
और जहर को पीयूष लिखा है,,
झूठ का पर्दा है आखो पर,
धूल हटाकर आँख बचालो,

बिखरें हैं जो शब्द पिरोकर…

दान, मान सम्मान के लायक,
तुम दाता हो, मालिक हो तुम,
लड़ना सीखो बढ़ना सीखो,
सीखो लिखकर पढ़ना भी तुम,
सत्य लिखो संघर्ष भी लिखकर,
जो बीता बचपन लिख डालो,,

बिखरें हैं जो शब्द पिरोकर…

बुद्ध, अशोक, फूले कबीर,
सब, संघर्षो की गांथाये हैं
पुनः बनाओ विश्व पटल खुद
खुद का पंचशील अपनाओ,
सम्यक दृष्टि, सम्यक वाचा,,
सम्यक शील अटल लिख डालो,

बिखरें हैं जो शब्द पिरोकर…

मुश्किल है पर नामुमकिन हो,
पथ इतना अवरुद्ध नहीं है,
माना पत्थर बहुत बडा़ पर,
अपनी छैनी भी कुदं नहीं है,,
पथ में जितनी भी चट्टाने हैं,
माझी बन टुकडे कर डालो

बिखरें हैं जो शब्द पिरोकर…

मत सोचो कब फल आयेगा,
आज नहीं तो कल आयेगा,
जितना गहरा कुँआ खुदेगा,
उतना मीठा जल आयेगा,
एस. कुमार, स्वयं दीप बन,
पथ अपना रोशन कर डालो,,

बिखरे हैं जो शब्द पिरो कर,
सुंदर एक गजल लिख डालो,,
आज नहीं यदि लिख सकते तुम,
कलम उठाओ कल लिख डालो,,

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