Oct 27, 2019
कविता · Reading time: 1 minute

आज दीवाली(दीपावली)

उत्साह, उमंग ,प्रकाश का इज़हार है
आज दीपावली ,दीपोत्सव का बहार है,

अन्धकार पर प्रकाश लाए
मन में नई आस लाए,

गांव घर व शहर मुहल्ला
सब जगह हो जाये हल्ला ,

व्यापारी हो ,या हो कर्मचारी
सब करते हैं खूब खरीदारी,

बच्चे बूढ़े और जवान
सब हो जाते हैं एक समान,

लाल पीली और रंगीली
बहुरंगों से बनती रंगोली,

सब मिलके गाते गीत
दोस्त दुश्मन हो जाते मीत,

दीपावली संस्कृति की है निशानी
ये तो रावण पर राम विजय कर ,
अयोध्या आने की है कहानी ।

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मेरे मुख से सहसा निकला उदगार मेरी लेखनी बनती है , लोगों की दर्द-पीड़ा मेरी लेखनी की जननी बनती है । (9973343915) +2' शिक्षक ।
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