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आज की बेटी

Sonika Mishra

Sonika Mishra

कविता

December 7, 2016

है अग्रसर देश मेरा
पर आज की बेटी कहां है

खुद की आवाज बनती
खुद बिखरती खुद संवरती
पर आज की बेटी कहां है

है ज्वलित हर मुद्दा यहां
खोदता हुआ गड़ा मुर्दा यहां
पर आज की बेटी कहां है

न पक्ष न कोई विपक्ष है
बह रहा स्त्री का दर्द है
पर आज की बेटी कहां है

खोजती रही झरोखों में उजाले
आज के सूरज को देखा कहां है
पर आज की बेटी कहां है

-सोनिका मिश्रा

Author
Sonika Mishra
मेरे शब्द एक प्रहार हैं, न कोई जीत न कोई हार हैं | डूब गए तो सागर है, तैर लिया तो इतिहास हैं ||
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