आज-काल के लड़का-बिटिया

आज-काल के लड़का-बिटिया
अइसन मारत हें स्टाइल ।
काने मा खोंसे इयर फोन
लै दुई हाथ मोबाइल ।।

रात-रात मोबाइल मा
करत हेमयं ईं बात ।
नींद खुलय जब पापा के
ता मारैं इनही लात।।

बात के आगें सबय बिसर गें
ना लागय भूख-पिआस।
लड़कन का सुधारयं मा( घर के )
कर डालिन अथक प्रयास ।।

आज-काल के लड़का-बिटिया
टाइम करत हें वेस्ट ।
सर्च मार के एफ.बी., इंस्ट्रा
मा भेजत हेमयं रिक्वेस्ट ।।
गलती से जो एक्सेप्ट किहिन ऊं
ता देखा उनखर रेरा ।
हाय-हेलो अउर एजी-ओजी
भेजयं तीसन बेरा।।

टीप-टाप तो बनय रहय
होटल मा पियॅअ ईं काफिंग।
चड्ढी तक जे खरीदिन न होइहैं (अपने से)
करैं ऑनलाइन शापिंग ।।

लड़कन का तो छोड़ देया
सयाॅनव मोबाइल गूलयं।
टथिया परसी धरी रहय
खाना-पीना भूलयं।।

अरे ए.के.भइया खुदय बिजी हें
या मोबाइल के जाल मा।
सीधे कबहू न देखिहैं भइया
चलत हें अपने चाल मा।।

/=/ जय-हिंद /=/

बघेली रचना।
✒✒अखिलेश पटेल ‘AK’
अमरपाटन, जिला-सतना
मध्यप्रदेश

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