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आज कल शायरी चल रही है सनम

आज कल शायरी चल रही है सनम!

मिलने की है यादें बिछड़ने के है गम!

गाऐ जा रहे है किस्से मुलाकातों के हम!

बेवफा न कहा तुझे किसीसे मेरे हमदम!

मिलना न हमको दोबारा तुम्हें मेरी कसम!

काफ़ी है इतना ना करना अब कोई सितम!

दिन तो छोटे थे रातें भी पड़ गई अब कम!

मुलाकातों की यादें है इन दर्दों पर मरहम!

बस कुछ इस तरह से जी रहे हम!

आज कल शायरी चल रही है सनम!

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Govind Kurmi
Govind Kurmi
सागर
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