गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

आज आबरू लूटी है जिसकी

लाज बचालो भारत माँ की,
बो सबकी महतारी है l
आज आबरू लूटी है जिसकी,
वो माँ बहन हमारी है ll

भूखे फिरते यहाँ शियासी,
कल तुमरी की बारी है l
लूट जाएगी इक उर इज्जत,
क्या उसकी तैयारी है ll

लाज शर्म को नही ठिकानो,
नंगो की भारमारी है l
हिजड़ा बनकर बनी क्यो बैठी,
ये सरकार हमारी है ll

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संप्रति - शिक्षक संचालक -G.v.n.school dungriya लेखन विधा- लेख, मुक्तक, कविता,ग़ज़ल,दोहे, लोकगीत भाषा शैली - हिंदी और बुन्देली भाषा में रचनाएं रस - मुख्य रूप से करुण रस, श्रृंगार रस,…
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