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आज अरमानो को टूटते हुए देखा/मंदीप

Mandeep Kumar

Mandeep Kumar

गज़ल/गीतिका

October 30, 2016

आज अरमानो को टूटते हुए देखा,
किसी को आज हाथ छोड़ते हुए देखा।

कितनी भी वफाई कर लो वफ़ा से,
आज बेवफ़ा को दूर जाते हुए देखा।

बनाता ख्वाब दिल मेरा रातो को,
उन ख्वाबो को सुबह होते ही टूटते देखा।

था नही यकीन ऐसा होगा कभी,
आज वो सब आँखो ने होते हुए देखा।

कितना दर्द था उस को आज ये कौन जाने,
आज बरी महफ़िल में उस दीवाने को रोते हुए देखा।

था यकीन जिस पर हद से ज्यादा,
आज उस को गैरो की तरह जाते हुए देखा।

बैठा था कोइ अनजान जगह ,
उस जगह कोई आँसू गिरते हुए देखा।

जहाँ मिलती थी रुस्वाई हर बार,
आज किसी को उसी जगह जाते हुए देखा।

जीता था जो सान से हर पल को,
आज उस को पल पल मरते हुए देखा

चलता था जो अकड़ कर “मंदीप”
आज उस को अंदर से टूटते हुए देखा।

मंदीपसाई

Author
Mandeep Kumar
नाम-मंदीप कुमार जन्म-10/2/1993 रूचि-लिखने और पढ़ाने में रूचि है। sirmandeepkumarsingh@gmail.com Twitter-@sirmandeepkuma2 हर बार अच्छा लिखने की कोशिस करता हूँ। और रही बात हम तो अपना दर्द लिखते है।मेरा समदिल मेरे से खुश है तो मेरी रचना उस के दिल का... Read more
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