Aug 16, 2016 · कविता
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आजा सनम,,,

फिर एक तड़प
फिर एक रुसवाई है
आजा सनम
यादें मिलने आई है।

फिर एक सूनापन
फिर एक पुरवाई है
आजा सनम
जिंदगी मुरझाई है।

फिर एक ख़ामोशी
फिर एक तन्हाई है
आजा सनम
आँखें भर आई हैं।
,,,लक्ष्य

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Lakshya thakur
9 Posts · 121 Views
मेरी रचनाएँ दिल से निकलती हैं जिनमें काव्यशिल्प से ज्यादा भावों का जोर होता है।यहाँ... View full profile
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