कविता · Reading time: 1 minute

“”आजा आजा तुझको बसा लूं””

देखा तुझे मैंने पहली नजर में
खो गया दिल तेरी डगर में,
आजा – आजा तुझको बसा लूं
मेरी धड़कन के शहर में।।
(१) जब से तुझ से नैना लड़े हैं,
निंदिया मेरी खो सी गई है।
तनहाई में कैसे गुजरे न रतिया,
आंखों ही आंखों में बीत रही है।
जागा जागा मैं तो चारों पहर में,
आजा आजा तुझको बसा लूं
मेरी धड़कन के शहर में।।
(२) जोड़ा मैंने तुझसे ही नाता,
तेरे बिना जी नहीं हूं पाता।
अनुनय सारे सुख मै तुझको तो दूंगा
जनम जनम तक तेरा रहूंगा।
डूब जाएं आ प्रीत लहर में,
आजा आजा तुझको बसा लूं,
मेरी धड़कन के शहर में।।
राजेश व्यास अनुनय

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