आजमाना आ गया ...!!

खुद में खुद को आजमाना आ गया ।
रोज कुछ तरकीबें और कुछ बहाना आ गया ।

शायद अब तन्हां नही रहा मैं
मेरे पीछे सारा जमाना आ गया ।

इश्क़ में शायद थोड़े थे परेशान
अब तो गम को भी छुपाना आ गया ।

मैंने खुद को देखा कभी पुरानी तस्वीरों में ,
याद बचपन का वो ज़माना आ गया ।

रिश्तों की बागडोर समझ आयी नही कभी ,
अब तो हर रिस्ते निभाना आ गया ।

ज़माना अब नही झेलता तन्हाईयों को ..
उन्हें भी अब थोड़ा हसाना आ गया ।

अब मुझे कोई फर्क़ नही पड़ता …
खुद से खुद को दिल लगाना आ गया ।

तुम जो आयी मेरी जिंदगी में ,
ऐसा लगा कोई खजाना आ गया ।

:-हसीब अनवर

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