.
Skip to content

आजमाते हो

सगीता शर्मा

सगीता शर्मा

गज़ल/गीतिका

March 1, 2017

1222/1222/
आजमाते हो

समन तुम क्यू रूलाते हो.
रूला कर फिर मनाते हो

चले जाये सुनो इक दिन.
हमे तुम क्यू सताते हो.

खफा जो हम हुये तुम से
बहाने फिर बनाते हो

सताये याद जब तुम को.
मुहब्बत फिर जताते हो.

तुम्हारे थे तुम्हारे है
हमे क्यू आजमाते हो..

पकड़ कर हाथ गैरो का
जला कर मुस्कुराते हो.

संगीता शर्मा.
1/3/2017

Author
सगीता शर्मा
परिचय . संगीता शर्मा. आगरा . रूचि. लेखन. लघु कथा ,कहानी,कविता,गीत,गजल,मुक्तक,छंद,.आदि. सम्मान . मुक्तर मणि,सतकवीर सम्मान , मानस मणि आदि. प्यार की तलाश कहानी पुरस्क्रति.धूप सी जिन्दगी कविता सम्मानित.. चाबी लधु कथा हिन्दी व पंजाबी में प्रकाशित . संगीता शर्मा.
Recommended Posts
क्यू तुमने मुँह फेर लिया
सर्द रात जब तुम असहाय पीड़ा में थी मेरी किलकारी ने तुम्हारे सारे दर्द को भुला दिया था और तुम मुस्कुराते हुए बोली थी तुम... Read more
आइना
आइना हो मेरा या, अक्स हो तुम.... या दिल से जुड़ा, कोई गहरा शक्स हो तुम..... मन में रहती है बात मेरे, पर कह जाती... Read more
पापा तुम तस्वीर मे रहते हो
NIRA Rani कविता May 19, 2017
कहते है पापा घर मे रहते है पर वो कमरे मे नही तस्वीरो मे रहते है अक्सर उनके साए से बात कर लेता हूं चुपचाप... Read more
गज़ल :-- जमीं का चार गज होगा !!
गज़ल :-- जमीं का चार गज होगा !! बहर :-- 1222 -1222 -1222 -1222 शिवालय भी सुसज्जित हो सुशोभित आज हज होगा !! तुम्हारे होंठ... Read more