कविता · Reading time: 1 minute

आजकल हम महिलाएं

आजकल हम महिलाएं पुरुष सी बन रही है
अपनी कमनीयता को छोड़ कर हम
कठोर ओर मजबूत होती जा रही है
हम रात में घबराती नहीं बल्कि हिम्मत रखती हैं
हम अब बात बात में आंसू बहाती नहीं
माँ पिता के नाम को ऊंचा कर रही है।
आजकल हम महिलाएं पुरुष सी बन रही है।।

काम कर पैसा भी कमाती है ओर साथ साथ
हर रिश्ते को भी ईमानदारी से निभाती है
आधुनिक परिधान भी हमको भाता है
साड़ी में भी हम खूब जमती हैं ओऱ
घर परिवार की मर्यादा का भी पूरा पूरा
खयाल हम करती हैं पल पल
आजकल हम महिलाएं पुरुष सी बन रही है।

हम बखूबी घर के कामों को भी निपटाती
ओर बच्चो के प्रोजेक्ट होमवर्क भी कराती हैं
अब नौकरी करने भी जाती हैं और साथ में
घर का सामान ओर साग सब्जी भी लाती हैं
घर ओर आफिस के पाटो में पिस रही है
फिर भी हम किसी से कम नही मानती हैं
आजकल हम महिलाएं पुरुष सी बन रही है।

हम सब समझ जाती हैं औऱ सब जानते हुए भी
अक्सर चुप रह जाती है सब्र का घूट पीकर भी
आंखो से ही पता लगाना अभी तक भूली नहीं
हम मजबूत इरादें रखती हैं कभी डरती नहीं
हम आज की नारी है सब कुछ कर सकती हैं
पुरुषों के संग चल रही हैं कदम से कदम मिलाकर
आजकल हम महिलाएं पुरुष सी बन रही है।

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