.
Skip to content

** आग लगाकर **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

मुक्तक

February 23, 2017

प्यास जगाकर आग लगाकर पूछते हो क्या
ज़रा दिलपर अपने हाथ रख धड़कता है क्या
क्या पूछते हो दिल अपना पराया हुआ कब
अब ना पूछिये हाल अपना क्या से हुआ क्या ।।

?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
Recommended Posts
और क्या है
मुहब्बत की सियासत और क्या है बिना इसके हकीकत और क्या है चलो बचके सड़क पर मनचलों से बुजुर्गों की नसीहत और क्या है हमेशा... Read more
इरादा कर लिया क्या
इश्क़ करने का इरादा कर लिया क्या बर्बाद होने का इरादा कर लिया क्या कश्ती अपनी तूफानों में ले चले डूबने का इरादा कर लिया... Read more
हर तरफ गहरी नदी है, क्या करें
हर तरफ गहरी नदी है, क्या करें तैरना आता नहीं है, क्या करें ज़िंदगी, हम फिर से जीना चाहते हैं पर सड़क फिर खुद गई... Read more
गजल
मुहब्बत की सियासत और क्या है बिना इसके हकीकत और क्या है चलो बचके सड़क पर मनचलों से बुजुर्गों की नसीहत और क्या है हमेशा... Read more