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आग ये अपनों की लगाई है

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गज़ल/गीतिका

November 12, 2017

आग ये अपनों की लगाई है
ये तभी बुझ कभी न पाई है

है ख़ज़ाने हमारे सब खाली
हमने इज़्ज़त ही बस कमाई है

आज लड़कर उन्होंने यूँ हमसे
ताली इक हाथ से बजाई है

साथ अब तो निभाना ही होगा
गम से जब हो गई सगाई है

फ़र्ज़ अब तो निभाती बेटी भी
मत कहो बोझ है, पराई है

दिल की कड़वाहटें मिटाने की
सिर्फ ये प्यार ही दवाई है

इस तिरंगे में ही लिपटने को
जान वीरों ने हँस गँवाई है

साँस लेना हुआ बड़ा मुश्किल
धुंध चारों तरफ ही छाई है

‘अर्चना’ फ़र्क़ सारे मिट जाते
आखिरी होती जब विदाई है

डॉ अर्चना गुप्ता

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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