कविता · Reading time: 1 minute

आखिर कोई क्यू

आखिर कोई क्यों
मुझे पढ़ना चाहेगा?????

अपने अमूल्य जीवन का
निर्धारित वक्त
क्यों
मुझमें व्यर्थ करेगा?????

कई बार
कलम …
ठिठक जाती है

ज्ञान कोष
निरुत्तर हो

जल सी निकली
मछली जैसा

तपते इस/
सावली रेत पर./
तड़पने लगता है…..

आखिर क्यों???
कोई मुझे पढ़ेगा……

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