*** " आओ सोंच के देखें जरा........! " ***

* जिंदगी के कई रंग देखो ,
बे-तुका जीवन जीने के ढंग देखो।
कहीं है , मौज-मस्ती ;
कहीं-कहीं है, मौत सस्ती ।
फर्राटे से चलते हैं ,
अपने आप मौत का राह गढ़ लेते हैं ।
क्या गति, कितनी हो चाल ,
क्षणभर में कर दे हमको बेहाल।
कैसी आवाज, कैसी है संकेत ,
इसका कोई मोल न समझता ;
इसका कोई रोल (भूमिका) न समझता।
हमें , ये क्यों समझ नहीं आता है,
” हम किसी के भाई हैं । “
” ओ किसी के लुगाई है ।। “
” आज किसी की सगाई है ।।।”
” और कल किसी की सहनाई है ।।।। “
कोई किसी के बाप है ,
और कोई किसी के बेटे ।
फिर….! , छोटी सी मूल से ;
क्यों…? , किसी के जीवन-रेखा को मेंटें।
** क्यों….?, उन बातों को नहीं अपनाते हैं ;
क्यों…?, अपनी जीवन को खुशियों से नहीं सजाते हैं।
सुरक्षा के साधनों को, सुरक्षा के नियमों को ;
क्यों…? , नहीं अपनाते हैं,
और आसानी से मौत को गले लगाते हैं।
अनचाहे, बे-समय , ” यमदूतों ” को बुलाते हैं ;
और अभयदान की , ” यम जी ” से गुहार लगाते हैं।
यमदूत भी कोई राज्यमंत्री तो नहीं ,
जो कई-कई बे-मौत की, योजना चलाये ;
और अनावश्यक पापों के घड़ा भर,अपने पास रख जये।
वह कोई IDEA , AIRTEL और RELIANCE के ;
Marketing manager भी तो नहीं,
जो अनलिमिटेड दुर्घटनाओं के आफर चलाये।
उन्हें भी यम को , मृत्यु या घटना का कारण देना होता है ;
उसे भी (यम) हरिहर (प्रभु ईश्वर) को ,
उचित मृत्यु-टैक्स देना होता है ।
यम के पास भी कोई ” स्वीस बैंक ” तो नहीं ,
जो अकाल दुर्घटना या अकाल मृत्यु को ,
जमा कर , ब्याज कमाये ।
*** जिन्दगी के कई रंग है देखो ,
जीवन जीने के कई ढंग है देखो ।
” हरा है, हरियाली का रंग ,
संतुलन खुशियाली के संग। “
” लाल है , जीवन से खतरा,
न समझो तो, मौत का है पोथी-पतरा। “
” पीला है, ‘ Ready to start ‘ के संकेत ,
आगे बढ़ना है , संभल के चलना है ,
और जीवन में लंबी सफ़र तय करना है। “
कहता है ये मेरा पागल-मन-आवारा ,
खुशियों से सदा भरी रहे अमूल्य जीवन हमारा।
सोंचो तो ये है लाख टके की बात है ,
और न सोंचो तो ” मौत , हरदम-हरपल साथ है “।
और न सोंचो तो ” मौत , हरदम-हरपल साथ है”।।

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* बी पी पटेल *
बिलासपुर ( छ. ग.)

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